कौएराज और उल्लूराज एक दूसरे के शत्रु बन चुके थे । एक बार कौवों के मंत्री ने कहा कि उसके पास शत्रुओं से निपटने की एक योजना है । उसने कहा , “ आप सब मुझे घायल करके फेंक दीजिए जिससे मैं मनगढंत कहानी सुनाकर उल्लुओं से मित्रता कर लूँ । " वैसा ही हुआ । घायल मंत्री कौए ने उल्लुओं को अपना दुखड़ा सुनाया और उल्लूराज की प्रशंसा करी । उनसे आश्रय मांगा और उनकी सेवा करने लगा । साथ ही आत्मदाह करके अगले जन्म में उल्लू बनने की इच्छा बताई । वहीं रहकर उल्लुओं की गुफा के दरवाजे पर उसने सूखी लकड़ियाँ इकट्ठी करीं । फिर अपने राज्य में जाकर कौवों को जलती मशाल के साथ , अगले दिन गुफा के द्वार पर बुलाया । उन्होंने इकट्ठी लकड़ियों पर अपनी जलती मशाल लाकर डाल दी । आग भभकी , गुफा धुँए से भर गया तो सारे उल्लू वहाँ से भाग खड़े हुए । 

शिक्षा : मुसीबतों से बचने के लिए बुद्धिमानी आवश्यक है ।

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