एक बहुत ही गरीब मछुआरा था । वह प्रतिदिन मछली पकड़ता और उन्हें बेचकर परिवार को पालता था । एक बार सारे दिन प्रयत्न करने के बाद भी वह एक भी मछली नहीं पकड़ सका । वह बहुत दुःखी हो गया क्योंकि अपने परिवार को खिलाने के लिए उसके पास कुछ नहीं था । उसने साहस जुटाकर अंतिम बार जाल डाला तो एक नन्हीं मछली फँसी । चलो कुछ तो मिली ... यह सोचकर उसे खुशी - खुशी ज्योंही वह अपनी टोकरी में डालने लगा , मछली बोली , “ श्रीमान् ! मुझे अभी छोड़ दीजिए । मैं बहुत छोटी हूँ । पर मैं वादा करती हूँ कि बड़ी होकर मैं आपका भोजन स्वयं बनूंगी पर अभी मुझे जाने दें । " यह सुनकर मछुआरे को उस पर बहुत दया आई । वह पल भर के लिए सोच में पड़ गया फिर उसने कहा , “ नहीं , यदि मैंने तुम्हें छोड़ दिया तो फिर तुम्हें पकड़ नहीं पाऊँगा । तुम मेरे हाथ नहीं आओगी । मैं बच्चों को क्या खिलाऊँगा ... 

 शिक्षा : बड़े - बड़े वादों से तो छोटा लाभ कहीं अच्छा है ।

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