एक दिन एक कुत्ता किसी गली में घूम रहा था । घुमते - घुमते उसे हड्डी का एक टुकड़ा मिला । हड्डी का टुकड़ा पाकर कुत्ता बहुत प्रसन्न हुआ ।

 उसने अपने घर जाकर आराम से उसे खाने का मन बनाया । अपने मुँह में हड्डी का टुकड़ा दबाए हुए वह घर जाने के लिए पुल पार करने लगा । अचानक उसने पानी में अपनी परछाईं देखी । उसे लगा कि दूसरे कुत्ते के पास उससे भी बड़ी हड्डी का टुकड़ा है । उसे लालच आ गया । क्रोध में वह गुर्राने और भौंकने लगा । हड्डी पानी में गिर गई और वह भी कुत्ते पर झपटा । 

पानी में कूदने पर उसे अपनी भूल का अहसास हुआ । बड़ी कठिनता से तैरता हुआ कुत्ता किनारे पहुँचा और अपनी जान बचाई । हड्डी तो चली ही गई ... सारे दिन उसे भूखा भी रहना पड़ा ... लालच के कारण उसकी जान पर भी बन आई थी ।


 शिक्षाः जो मिले उसी में संतोष करना चाहिए । 

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