एक पेड़ के कोटर में एक तीतर रहता था । दाना चुगते - चुगते एक दिन वह एक पके हुए धान के खेत में पहुँचा और फिर वहीं रुक गया । 

कुछ दिनों बाद फिर वह लौटकर अपने कोटर में पहुँचा । वहाँ उसने एक खरगोश को रहता देखकर पूछा कि वह क्या कर रहा था । खरगोश ने कहा कि कोटर तो खाली था वह तीतर का घर ही नहीं था । दोनों इसी बात को लेकर लड़ने लगे । एक धूर्त बिल्ली ने उन्हें लड़ते देखा । उसे एक युक्ति सूझी । वह सन्यासी के रूप में उनके सामने आयी ।

 उसे देखकर दोनों ने बिल्ली से मामला सुलझाने के लिए कहा । बिल्ली ने उनकी बात सुनकर कहा कि वह बहुत बूढ़ी हो गयी है । उसे कम सुनाई देता है । उसने दोनों को पास आने के लिए कहा । ज्योंही तीतर और खरगोश उसके पास गए बिल्ली उन पर झपट पड़ी ।


 शिक्षा : शत्रु पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए ।

Post a Comment