चतुर खरगोश एक बार हाथियों का एक झुण्ड चन्द्रताल नामक तालाब के पास रहने आ गया ।


 उसी तालाब के पास हजारों खरगोश बिल बनाकर रहते थे । हाथी जब पानी पीने जाते तो बेचारे खरगोश उनके पैरों से कुचल जाते और उनके घर भी टूट जाते थे । दुःखी खरगोशों ने अपने राजा से सहायता मांगी । खरगोशराज हाथीराज के पास गया । उसने कहा कि चन्द्रदेव हाथियों से रुष्ट हो गये थे । उन्होंने उसे यह बताने भेजा था कि हाथियों ने चन्द्रताल की पवित्रता भंग की थी । 

दुःखी होकर हाथीराज ने क्षमायाचना का तरीका पूछा । खरगोशराज अपने साथ हाथीराज को चन्द्रताल के पास ले गया । वहाँ हाथीराज ने चन्द्रदेव का प्रतिबिम्ब देखा । हाथीराज ने वादा किया कि वह सभी हाथियों को लेकर चुपचाप वहाँ से किसी दूसरी जगह चला जाएगा और फिर कभी नहीं आएगा । बस खरगोश खुशी - खुशी वहाँ रहने लगे । 

शिक्षा : चतुर नेता से सबका भला होता है ।

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