एक बार एक गुरु ने अपने शिष्य को किसी के प्रति भी निर्दयी नहीं होने की सलाह दी ।

  Guru-ki-Salah-Panchtantra-ki-Hindi-Kahaniya 

 शिष्य ने गुरु की सलाह पर ध्यान नहीं दिया और एक शिकारी बन गया । वह निरपराध जानवरों को बिना किसी कारण के सताकर आनन्दित होता था । 


एक दिन वह एक जंगल से गुजर रहा था । उसने तीन बंदर बैठे देखे । उसने अपना धनुष उठाया , निशाना साधा और तीर छोड़ दिया । वे घायल हो गये । 


प्रसन्न मन से वह अपने घर की ओर चल दिया । अचानक जोरों की बारिश होने लगी । घर पहुँचकर उसने देखा कि बिजली गिरने से उसका घर क्षतिग्रस्त हो गया था । उसके बच्चे और पत्नी घायल हो गए थे ।


 तभी एक खम्भा उसके सिर पर पीछे की ओर से गिरा और वह भी घायल हो गया । दर्द से वह कराह उठा । तकलीफ होने पर उसे अपने गुरु की बात याद आयी और वह पश्चात्ताप करने लगा । 

शिक्षा : निर्दयतापूर्ण व्यवहार विनाश लाता है ।

Post a Comment