एक बढ़ई जंगल में लकड़ी काट रहा था । तभी उसे एक शेर आता हुआ दिखा । 


Badai-Aur-Sher


भयभीत बढ़ई ने बुद्धिमत्ता से काम लिया और शेर को अपना भोजन खिलाया । शेर को भोजन बहुत अच्छा लगा । उसने बढ़ई को निडरतापूर्वक जंगल में घूमने के लिए कहा । 


बढ़ई ने उसका धन्यवाद किया और आभार स्वरूप प्रतिदिन अकेले ही भोजन के लिए शेर को आने को कहा । बढ़ई स्वादिष्ट भोजन लाया करता दोनों साथ - साथ भोजन करते थे ।


 शेर के सहायक सियार और कौआ यह जानने को परेशान थे कि हुजूर आखिर कहाँ जाते थे । एक दिन दोनों साथ सियार और कौए ने भोजन पर साथ चलने की जिद की । बढ़ई ने शेर को आता देखा तो पास के वृक्ष पर चढ़ गया । 


शेर ने बढ़ई से उसके भय का कारण पूछा । बढ़ई ने कहा , “ मुझे आपसे भय नहीं है पर आपके मित्रों पर विश्वास नहीं है । " 44 


शिक्षा : समझदार सोचकर ही मित्रता करते हैं ।

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