बंदर और गौरैया जाड़े की ठिठुरती हुई एक शाम थी । बारिश हो चुकी थी और हड्डियों को चुभने वाली तेज हवा चल रही थी ।

  Bandar-Aur-Goreyya-Panchtantra-ki-Kahani 

 ठंड से बेहाल , बंदरों के झुंड ने एक पेड़ के नीचे आकर आश्रय लिया । उन्होंने सूखे पत्ते और टहनियाँ इकट्ठी कर उस पर लाल - लाल झड़बेरी रखी । झड़बेरी को उन्होंने लाल अंगारा समझा जिसमें आग जलती और उन्हें गर्मी मिलती ।


 पेड़ पर बैठी गौरैया ने उन्हें बताया कि वह अंगारा न होकर झड़बेरी है पर बंदरों ने ध्यान नहीं दिया । आग जलाने के लिए वे फूंक मारने लगे । गौरैया ने उन्हें पुनः समझाने का प्रयत्न किया तो बंदर नाराज हो गए ।


 बंदरों ने उसे उनके माम में टाँग अड़ाने किया पर गौरैया उन्हें सलाह देती रही । क्रोध में आकर बंदर ने उस पर छलांग लगा दी । गौरैया को चोट लग गई पर वह उड़कर भाग गई । 


शिक्षा : मूर्खों को सलाह देने से चुप रहना बेहतर

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