एक बार एक जंगल में एक कछुआ और दो हंसों में गाढ़ी मित्रता थी । तालाब के किनारे वे हर दिन मिलते थे । एक वर्ष बहुत कम बारिश हुई । 


हंस और कछुआ ki kahani


तालाब को सूखा देखकर हंसों को चिंता होने लगी । उन्हें पहाड़ के दूसरी ओर एक और तालाब का पता चला । उन्होंने वहाँ जाने का निर्णय किया । 


अपने प्रिय मित्र कछुए से वे दूर नहीं होना चाहते थे इसलिए उन्होंने कछुए को भी साथ चलने के लिए कहा । कछुए ने कहा कि वह तो उड़ नहीं सकता है पर उसके पास एक युक्ति है ।


 उसने हंसों को एक डंडी अपनी चोंच में पकड़ने के लिए कहा और डंडी को बीच से वह पकड़ लेगा । हंस राजी हो गए पर उन्होंने कछुए को उड़ते समय अपना मुँह खोलने से मना किया ।


 वे तीनों उड़ते हुए एक शहर के ऊपर से जा रहे थे । शहर के बच्चे इस आश्चर्यजनक दृश्य को देखकर खुश होकर शोर मचाने लगे । कछुए ने भी कुछ कहना चाहा । अपना मुँह खोलते ही वह गिर पड़ा और घायल हो गया ।


शिक्षा : बुद्धिमानों की सलाह अवश्य माननी चाहिए ।

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